Tue09022014

Last updateTue, 02 Sep 2014 5pm

अपनी बात

राष्ट्रीयता का अभाव

68 वर्ष की आजादी और 68 वर्ष की तरक्की दोनों का हिसाब करें तो साफ नजर आता है कि तरक्की कम हुई! क्या कारण है कि गुलामी की जंजीरों से मुक्त होने के बाद भी हम समुचित विकास नहीं कर पाए? गरीबी, भ्रष्टाचार, व्याभिचार और सीमाओं पर बढ़ते आक्रमण पर अंकुश नहीं लगा पाए? स्वतंत्रता की वर्षगांठ पर यह चिंतनीय विषय है। सर्वविदित है कि कैसे हम अंग्रेजों के गुलाम बनें और किस प्रकार क्रांतिकारियों ने सर्वस्व लूटा कर देश को आजादी दिलाई। फिर भला क्यों भूल जाते है यह सब? कहीं न कहीं हममें राष्ट्रीयता का अभाव है। इस पावन पर्व पर हमें यह संकल्प लेना होगा कि भारत को ‘‘ विश्व गुरु ’’ का सम्मान मिले इस हेतू अपने सत्कर्मों से राष्ट्रभक्ति की भावना जगााए रखें। आवश्यकता इस बात की भी है कि प्रत्येक देशवासी को राष्ट्रीयता से ओत - प्रोत होकर भारत के चंहुमुखी विकास में योगदान देना होगा। यही अमर शहीदों को सच्ची श्रृ़द्धांजलि भी होगी! हालांकि समय - समय पर जनता ने एकजुटता का परिचय देकर न सिर्फ एक - दूसरे की मदद की है बल्कि विश्व समुदाय को भी चकित किया है। फिर चाहे वह कारगिल पर हमला हो या कोई प्राकृतिक आपदा। देश के हर नागरिक ने अपने सामथ्र्य से राष्ट्र यज्ञ में आहुति दी है। साथ ही देश के वैज्ञानिकों और तकनिकी विशेषज्ञों ने भी अपनी क्षमता का लोहा मनवाया है।लेकिन जब तक देश का हर नागरिक अपने कर्म को ‘‘ राष्ट्र कर्म ’’ नहीं समझेगा तब तक हमें यूं ही विकसित राष्ट्रों की प्रगति को देखते रहना होगा।

स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं..

                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                      

 

                                                                                                           सुनील गुप्ता - संपादक 

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शिक्षा और अध्ययन की महत्ता ...

 

 

 

 

शिक्षा और अध्ययन की महत्ता बताते हुए चाणक्य कहते हैं कि मनुष्य का जन्म बहुत सौभाग्य से मिलता है, इसलिए हमें अपने अधिकाधिक समय का वे‍दादि शास्त्रों के अध्ययन में तथा दान जैसे अच्छे कार्यों में ही सदुपयोग करना चाहिए।

 

 

 

 

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