Thu04242014

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अपनी बात

स्किन पर पड़े दाग - धब्बों से निजात पाए

आप अपनी स्किन में ग्लो लाना चाहती है तो यह कोई मुश्किल बात नहीं हैं। इसके लिए रसोई में मौजूद सब्जियों और फलों से आपको स्पेशल हैल्प मिलेगी।

आटे के चोकर में थोडा सा दूध, दही और कुछ बूंदें नीबू के रस कीमिलाकर पेस्ट तैयार कर लें। हल्के हाथों से फेस पर लगाएं और सूखने पर धो दें। इससे फेस पर पडे दागधब्बे व अन्य निशानों से निजात मिलेगी।

नीम की पत्तियों को पीस कर रख लें। इसे निशानों पर रातभर के लिए लगा छोड दें। सुबह ठंडे पानी से फेस धो लें। लगातार इस्तेमाल करने से निशानों से छुटकारा मिलता है।

दूध में चुटकीभर नमक मिला कर रूई के फाहे से फेस साफ करें। फेस के दाग साफ हो जाएंगे।

स्वास्थ्य के लिए बहुत ही फायदेमंद है नींबू पानी

नींबू बहुत ही गुणकारी है। कई रूपों में यह हमारे स्वास्थ्य के लिए फयदेमंद साबित होता है। नींबू विभिन्न विटामिन्स व मिनरल्स का खजाना माना जाता है। इसमें पानी, प्रोटीन, कारबोहाइड्रेट्स और शर्करा मौजूद होती है। नींबू विटामिन सी का बेहतर स्रोत है। इसमें विभिन्न विटामिन्स जैसे थियामिन, रिबोफ्लोविन, नियासिन, विटामिन बी- 6, फोलेट और विटामिन-ई की थोड़ी मात्रा मौजूद रहती है। जानिए नींबू पानी के फायदे के बारे में।नींबू पानी हमारे स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद है सिवाय उनके जिन्हें नींबू से एलर्जी होती है। यह खराब गले,कब्ज,किडनी स्टोन, और मसूड़ों की समस्याओं में राहत पहुंचाता है। ब्लड प्रेशर और तनाव को कम करता है। त्वचा को स्वस्थ बनाने के साथ ही लिवर के लिए भी यह बेहतर होता है। पाचन क्रिया,वजन संतुलित करने और कई तरह के कैंसर से बचाव करने में नींबू पानी मददगार होता है। नींबू पानी में कई तरह के मिनरल्स जैसे आयरन, मैग्नीशियम, फास्फोरस, कैल्शियम, पोटैशियम और जिंक पाए जाते हैं।

किडनी स्टोन- नींबू पानी का स्वास्थ्य पर पड़ने वाला सबसे महत्वपूर्ण फायदा है,इसका किडनी स्टोन से राहत पहुंचाना। मुख्यरूप से किडनी स्टोन शरीर से बिना किसी परेशानी के निकल जाता है,लेकिन कुछ मामलों में यह यूरीन फ्लो को ब्लॉक कर देते हैं जो अत्यधिक पीड़ा का कारण बनता है। नींबू पानी पीने से शरीर को रिहाइड्रेट होने में मदद मिलती है और यह यूरीन को पतला रखने में मदद करता है। साथ ही यह किडनी स्टोन बनने के किसी भी तरह के खतरे को कम करता है।

डायबीटीज रोगी का साथी- हाई शुगर वाले जूस व ड्रिंक का बेहतर विकल्प माना जाता है नींबू पानी। खासतौर से उनके लिए जो डायबिटिक हैं या वजन कम करना चाहते हैं। यह शुगर को गंभीर स्तर तक पहुंचाए बिना शरीर को रिहाइड्रेट व एनर्जाइज करता है।

पाचनक्रिया में फायदेमंद- नींबू पानी में मौजूद नींबू का रस हाइड्रोक्लोरिक एसिड और पित्त सिक्रेशन के प्रोडक्शन में वृद्धि करता है,जो पाचन के लिए आवश्यक है। साथ ही,यह एसिडिटी और गठिया के खतरे को भी कम करता है। जो लोग आमतौर पर पाचन-संबंधी समस्याओं जैसे एबडॉमिनल क्रैम्प्स,ब्लॉटिंग,जलन और गैस की समस्या आदि से परेशान होते हैं,उन्हें नियमित रूप से नींबू पानी का सेवन करना चाहिए।

कॉन्स्टीपेशन- नींबू पानी कॉन्स्टीपेशन की शिकायत से ग्रस्त लोगों के लिए बेहद फायदेमंद है। प्रतिदिन सुबह गर्म नींबू पानी पिएं और पूरे दिन कॉन्स्टीपेशन की समस्या से दूर रहें।

इम्यून सिस्टम- नींबू पानी बायोफ्लेवोनॉयड, विटामिन सी और फाइटोन्यूट्रियंट्स का बेहतर स्रेत है जो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता की शक्ति बढ़ाने में मदद करता है। इसमें मौजूद आवश्यक विटामिन्स और मिनरल्स के कारण यह शरीर के एनर्जी लेवल को बढ़ाने में मदद करता है।

खराब गला- नींबू पानी को गुनगुना करके पीने से गले की खराबी या फैरिन्जाइटिस में आराम पहुंचाता है।
वजन कम- हर सुबह शहद के साथ गुनगुना नींबू पानी पीने से अतिरिक्त वजन आसानी से कम किया जा सकता है।

मसूड़ों की समस्या- नींबू पानी पीने से मसूड़ों से संबंधित समस्याओं से राहत मिलती है। नींबू पानी में एक चुटकी नमक मिलाकर पीने से बेहतर परिणाम मिलते हैं।

कैंसरकारी तत्वों का विरोधी- कैंसर से बचाव के लिए नींबू पानी पीना फायदेमंद होता है। शोध अध्ययन बताते हैं कि नींबू अपने एंटी ट्यूमर गुणों के साथ कैंसर के खतरों को कम कर सकता है।

स्ट्रेस और ब्लड प्रेशर- नींबू पानी का एक और फायदा यह है कि इसमें ब्लड प्रेशर को कम करने के गुण के साथ ही तनाव,डिप्रेशन और अवसाद कम करने के गुण पाए जाते हैं। नींबू पानी पीने से तुरंत ही आपको आराम का अनुभव होगा।
त्वचा की देखभाल- नियमित रूप से नींबू पानी पीने से त्वचा जवां नजर आती है। नींबू एंटीऑक्सीडेंट्स गुणों से भरपूर होता है। जाने-माने एंटी-एजिंग गुणों वाला नींबू और दूसरे एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर खाद्य पदार्थ आजकल अत्यधिक पसंद किए जा रहे हैं।

इसके अलावा भी यह डायरिया जैसी समस्याओं में असरदार होता है। मासिक चक्र के दौरान महिलाएं तीन से चार नींबू के रस का प्रयोग कर दर्द से निजात पा सकती हैं। नींबू का ज्यादा से ज्यादा लाभ उठाने के लिए इसे गर्म पानी में मिलाकर पिएं।
बड़े-बुजुर्गों द्वारा हमेशा यह सलाह दी जाती है कि बेहतर स्वास्थ्य के लिए ढेर सारा पानी पिएं लेकिन आमतौर पर लोग पर्याप्त पानी नहीं पी पाते, क्योंकि पानी में उन्हें कोई स्वाद नहीं मिलता। ऐसी स्थिति में आप चाहें तो नींबू पानी पी सकते हैं जो स्वाद में बेहतर और ताजगी देने वाला होता है,साथ ही पानी और नींबू दोनों का भी आपको मिलता रहेगा और आप हमेशा स्वस्थ रहेंगे।

अंडरआर्म से छुटकारा पाने के कुछ घरेलू उपाए

अंडर आर्म के कालेपन से छुटकारा पाने के लिए घर में वाइटिंग पैक बनाएं। इस तरह के पैक को बनाने के लिये आपको कोई बड़ा काम नहीं करना पडे़गा क्‍योंकि इसमें केवल घरेलू सामग्रियों की आवश्‍यकता पड़ती है। घरेलू नुस्‍खे आजमाने के साथ साथ आपको इस बात का भी ख्‍याल रखना पडे़गा कि आप बहुत ज्‍यादा बाजारू सामान का प्रयोग ना करें, जैसे डियोड्रंट आदि का। यहां पर कुछ घरेलू नुस्‍खे दिये जा रहे हैं जिसकी मदद से आप अपने काले पड़ चुके अंडर आर्म को सफेद कर सकती हैं। लेकिन किसी भी विधि को अपनाने से पहले उसे एक बार अपनी त्‍वचा पर टेस्‍ट कर लें। क्‍योंकि हो सकता है कि आपकी त्‍वचा संवेदनशील हो और यह आपको सूट ना करें या फिर रिऐक्‍शन दिखा दे। तो चलिये देखते हैं कौन से हैं वे घरेलू नुस्‍खे।
मेथी - मेथी के उपयोग से आप अपने अंडरआर्म को सफेद बना सकती हैं। इसके लिये आपको 5 एम एल पिसी हुई मेथी के पत्‍ते चाहिये और थेाड़ा सा पानी। इस पेस्‍ट को अंडरआर्म पर लगाइये और काले अंडरआर्म से मुक्‍ती पाइये। ऐसा हफ्ते में एक दिन कीजिये।
ऐलोवेरा - अपने अंडरआर्म को ऐलोवेरा के रस से मसाज कीजिये। यह काम आपको हर दो दिन पर करना पडे़गा। इसे 1 घंटे तक छोड़ने के बाद नहा लीजिये।

चंदन व गुलाब जल - डार्क अंडर आर्म की समस्या के निदान के लिए चंदन पाउडर व गुलाब जल के पेस्ट को अंडर आर्म पर लगाएं। चंदन रंग को निखारता है तथा गुलाब जल ठंडक प्रदान करता है और त्‍वचा को मुलायम भी बनाता है। इस पेस्ट को चार-पांच मिनट तक लगा रहने दें और फिर धो लें। कुछ ही दिनों में आपको लाभ होने लगेगा।
नींबू - ताजा नींबू काट कर उससे अंडर आर्म को मसाज करें। पर अगर आपकी स्‍किन संवेदनशील है तो नींबू का प्रयोग ना ही करें।
नीम - हफ्ते में एक दिन नीम का पेस्‍ट अंडर आर्म पर लगाएं। इससे आपके अंडर आर्म सफेद हो जाएंगे।
दालचीनी - दालचीनी को दूध के साथ पेस्‍ट बना कर लगाएं। जब यह सूख जाए तब अंडर आर्म को गीले कॉटन से पोंछ लें।
हल्‍दी - हल्‍दी काली पड़ चुकी त्‍वचा का रंग हल्‍का कर सकती है। आप चाहें तो हल्‍दी का पेस्‍ट बना कर अपने अंडर आर्म पर लगा सकती हैं।

सफेद बालों की समस्या से पाएं छुटकारा

*पिसी हुई सूखी मेहँदी एक कप, कॉफी पावडर पिसा हुआ 1 चम्मच, दही 1 चम्मच, नीबू का रस 1 चम्मच, पिसा कत्था 1 चम्मच, ब्राह्मी बूटी का चूर्ण 1 चम्मच, आँवला चूर्ण 1 चम्मच और सूखे पोदीने का चूर्ण 1 चम्मच। इतनी मात्रा एक बार प्रयोग करने की है। इसे एक सप्ताह में एक बार या दो सप्ताह में एक बार अवकाश के दिन प्रयोग करना चाहिए।

*सभी सामग्री पर्याप्त मात्रा में पानी लेकर भिगो दें और दो घण्टे तक रखा रहने दें। पानी इतना लें कि लेप गाढ़ा रहे, ताकि बालों में लगा रह सके। यदि बालों में रंग न लाना हो तो इस नुस्खे से कॉफी और कत्था हटा दें। पानी में दो घण्टे तक गलाने के बाद इस लेप को सिर के बालों में खूब अच्छी तरह, जड़ों तक लगाएँ और घंटे भर तक सूखने दें।

*इसके बाद बालों को पानी से धो डालें। बालों को धोने के लिए किसी भी प्रकार के साबुन का प्रयोग न करके, खेत या बाग की साफ मिट्टी, जो कि गहराई से ली गई हो, पानी में गलाकर, कपड़े से पानी छानकर, इस पानी से बालों को धोना चाहिए। मिट्टी के पानी से बाल धोने पर एक-एक बाल खिल जाता है जैसे शैम्पू से धोए हों।

*जपा (जवाकुसुम या जास्बंद) के फूल और आँवला, एक साथ कूट-पीसकर लुगदी बनाकर, इसमें बराबर वजन में लौह चूर्ण मिलाकर पीस लें। इसे बालों में लगाकर सूखने के बाद धो डालें।

हींग के घरेलू उपचार

दांतों में कीड़ा लग जाने पर रात्रि को दांत में हींग दबाकर सोएं। कीड़े खुद-ब-खुद निकल जाएंगे।

* यदि शरीर के किसी हिस्से में कांटा चुभ गया हो तो उस स्थान पर हींग का घोल भर दें। कुछ समय में कांटा स्वतः निकल आएगा।

* हींग में रोग-प्रतिरोधक क्षमता होती है। दाद, खाज, खुजली व अन्य चर्म रोगों में इसको पानी में घिसकर उन स्थानों पर लगाने से लाभ होता है।

* हींग का लेप बवासीर, तिल्ली व उदरशोथ में लाभप्रद है।

* कब्जियत की शिकायत होने पर हींग के चूर्ण में थोड़ा सा मीठा सोड़ा मिलाकर रात्रि को फांक लें, सबेरे शौच साफ होगा।

* पेट के दर्द, अफारे, ऐंठन आदि में अजवाइन और नमक के साथ हींग का सेवन करें तो लाभ होगा।

* पेट में कीड़े हो जाने पर हींग को पानी में घोलकर एनिमा लेने से पेट के कीड़े शीघ्र निकल आते हैं।

* जख्म यदि कुछ समय तक खुला रहे तो उसमें छोटे-छोटे रोगाणु पनप जाते हैं। जख्म पर हींग का चूर्ण डालने से रोगाणु नष्ट हो जाते हैं।

* प्रतिदिन के भोजन में दाल, कढ़ी व कुछ सब्जियों में हींग का उपयोग करने से भोजन को पचाने में सहायक होती है।

ब्लैक टी डायबिटीच से बचाए

एक अध्ययन में पाया गया है कि जो लोग नियमित रूप से काली चाय का सेवन करते हैं उन्हें मधुमेह की किस्म-2 का खतरा काफी कम होता है। 50 देशों से लिए गए आंकड़ों के नए विश्लेषण में पाया गया कि जिन देशों में काली चाय सबसे ज्यादा पी जाती है वहां पर मधुमेह से जुड़ी तकलीफें कम देखने को मिलीं। यह अध्ययन ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में प्रकाशित हुआ है। अध्ययन में पाया गया कि ज्यादा चाय का उपभोग मोटापे के निम्न स्तर से संबंधित है। वैज्ञानिकों को लगता है कि हरी चाय को काली चाय में बदलने वाली किण्वन प्रक्रिया कुछ स्वास्थ्यवर्धक जटिल यौगिकों का निर्माण भी कर सकती है। इस रिपोर्ट में काली चाय के उपभोग और विभिन्न बीमारियों की संभावना का विश्लेषण किया गया। इन बीमारियों में मधुमेह की किस्म-2 भी शामिल थी। काली चाय सबसे अधिक आयरलैंड में पी जाती है। बिक्री के आंकड़ों के मुताबिक, वहां प्रति व्यक्ति एक साल में काली चाय का उपभोग दो किलोग्राम है। इसके बाद ब्रिटेन व तुर्की का स्थान है। इन तीनों ही देशों में मधुमेह का स्तर कम उपभोग करने वाले अन्य देशों की तुलना में कम है। इस अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता जेनेवा स्थित डाटा माइनिंग इंटरनेश्नल के डॉक्टर एरियल बेरेस्नाइक के अनुसार, चाय पीने का संबंध अध्ययन की गई किसी अन्य बीमारी के साथ नहीं पाया गया। बीएमजे के प्रवक्ता के अनुसार, 'इस अध्ययन के परिणाम काली चाय के मधुमेह व मोटापे पर पड़ने वाले प्रभावों को जानने के लिए किए गए पिछले जैविक, शारीरिक, पर्यावरणीय अध्ययनों के परिणामों के अनुरूप हैं।'

दही के लाभकारी गुण

दही से आपकी त्वचा में नई रंगत व चमक आती है। दही के साथ आप बेसन या चोकर मिलाकर भी चेहरे पर लगा सकती हैं। इस प्रकार दही का एक गुणकारी सौंदर्य प्रसाधन के रूप में प्रयोग कर आप अपनी त्वचा में निखार ला सकती हैं। अगर आपको अपनी उम्र छुपानी हो तो अपने चेहरे को एकदम दमकता हुआ सा बना लें। कॉस्मेटिक्स से आपके चेहरे की रंगत कुछ समय के लिए बरकरार रह सकती है लेकिन घर में मौजूद प्राकृतिक दही को चेहरे पर लगाने से उसकी रंगत हमेशा बरकरार बनी रहेगी। त्वचा की रंगत निखारने में दही महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है। दही खाना ना केवल हमारे स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है बल्कि इसे शरीर पर उबटन या किसी फेस पैक में मिला कर भी लगाया जा सकता है। तो  ह्यसे में चलिये जानते हैं दही का त्वचा पर निखार किस प्रकार से होता है।

झुर्रियां मिटाए  - अगर उम्र से पहले ही झुर्रियों ने अपना प्रकोप फैलाना शुरू कर दिया है तो इनकी रफतार को धीमा कर दें। झुर्रियों को प्राकृतिक तरीके से कम करें जिसके लिये दही का फेस मास्क लगाएं। इसमें मौजूद लैक्टिक एसिड मृत्य कोशिकाओं को दूर कर के पोर्स को टाइट करती हैं।

रूखी त्वचा के लिये फायेदमंद दही यदि आपकी त्वचा रूखी है तो आप आधा कप दही में एक छोटा चम्मच जैतून का तेल तथा एक छोटा चम्मच नींबू का रस मिलाकर चेहरे पर लगाकर गुनगुने पानी से चेहरा धोने से त्वचा का रूखापन समाप्त हो जाता है।

रंग साफ करे - दही को आप किसी फेस पैक या फल के साथ मिला कर लगा सकती हैं या फिर ,ह्यसे ही दही को त्वचा पर लगाकर त्वचा को गुनगुने पानी से धोने से आपकी त्वचा नर्म व मुलायम होती है।

फलो व सब्जियों का पैक लगाएं - कटोरी दही में आधी कटोरी गाजर, ककडी, पपीता आदि मौसमी फलों का रस मिलाकर चेहरे पर लगाने से आपकी त्वचा में निखार आएगा। आप चाहे तो मौसमी सब्जियों के रस को भी दही में मिलाकर पैक तैयार कर सकते हैं।

मुहासों से छुटकारा पाएं - दही में एंटी बैक्टीरियल और एंटी फंगल गुण होते हैं। पिंपल से छुटकारा पाने के लिये दही को सीधे चेहरे पर लगाएं और इसे आधे घण्टे के बाद धो लें।

सर्दियों में हल्दी के घरेलू उपाए

पेट में कीड़े होने पर 1 चम्मच हल्दी पाउडर रोज सुबह खाली पेट एक सप्ताह तक ताजा पानी के साथ लेने से कीड़े खत्म हो सकते हैं। चाहें तो इस मिश्रण में थोड़ा नमक भी मिला सकते हैं। इससे भी फायदा होगा।

चेहरे के दाग-धब्बे और झाइयां हटाने के लिए हल्दी और काले तिल को बराबर मात्रा में पीसकर पेस्ट बनाकर चेहरे पर लगाएं। हल्दी-दूध का पेस्ट लगाने से त्वचा का रंग निखरता है और आपका चेहरा खिला-खिला लगता है।

खांसी होने पर हल्दी की छोटी गांठ मुंह में रख कर चूसें। इससे खांसी नहीं उठती। त्वचा से अनचाहे बाल हटाने के लिए हल्दी पाउडर को गुनगुने नारियल तेल में मिलाकर पेस्ट बना लें। अब इस पेस्ट को हाथ-पैरों पर लगाएँ। इसे त्वचा मुलायम रहती है और शरीर के अनचाहे बाल भी धीरे-धीरे हट जाते हैं।

सनबर्न की वजह से त्वचा झुलसने या काली पड़ने पर हल्दी पाउडर, बादाम चूर्ण और दही मिलाकर प्रभावित स्थान पर लगाएं। इससे त्वचा का रंग निखर जाता है और सनबर्न की वजह से काली पड़ी त्वचा भी ठीक हो जाती है। यह एक तरह से सनस्क्रीन लोशन की तरह काम करता है। मुंह में छाले होने पर गुनगुने पानी में हल्दी पाउडर मिलाकर कुल्ला करें।

घी के घरेलू उपचार

एक चम्मच शुद्ध घी, एक चम्मच पिसी शकर, चौथाई चम्मच पिसी कालीमिर्च तीनों को मिलाकर सुबह खाली पेट और रात को सोते समय चाटकर गर्म मीठा दूध पीने से आंखों की ज्योति बढ़ती है।

* एक बड़े कटोरे में 100 ग्राम शुद्ध घी लेकर इसमें पानी डालकर हलके हाथ से फेंटकर लगाकर पानी फेंक दें। यह एक बार घी धोना हुआ। ऐसे 100 बार पानी से घी को धोकर कटोरे को थोड़ी देर के लिए झुकाकर रख दें, ताकि थोड़ा बहुत पानी बच गया हो तो वह भी निकल जाए। अब इसमें थोड़ा सा कपूर डालकर मिला दें और चौड़े मुंह की शीशी में भर दें। यह घी, खुजली, फोड़े फुंसी आदि चर्म रोगों की उत्तम दवा है।

* रात को सोते समय एक गिलास मीठे दूध में एक चम्मच घी डालकर पीने से शरीर की खुश्की और दुर्बलता दूर होती है, नींद गहरी आती है, हड्डी बलवान होती है और सुबह शौच साफ आता है। शीतकाल के दिनों में यह प्रयोग करने से शरीर में बलवीर्य बढ़ता है और दुबलापन दूर होता है।

* घी, छिलका सहित पिसा हुआ काला चना और पिसी शक्कर (बूरा) तीनों को समान मात्रा में मिलाकर लड्डू बांध लें। प्रातः खाली पेट एक लड्डू खूब चबा-चबाकर खाते हुए एक गिलास मीठा कुनकुना दूध घूंट-घूंट करके पीने से स्त्रियों के प्रदर रोग में आराम होता है, पुरुषों का शरीर मोटा ताजा यानी सुडौल और बलवान बनता है।

कुहनी एवं घुटनों का काला पन दूर करने के कुछ उपाए

काली कुहनियां और घुटने देखने में बहुत ही गंदे लगते हैं इसके अलावा यह हर किसी का ध्यान आसानी से अपनी ओर खींच लेते हैं। हाथ-पैर गोरे हों और घुटने काले, तो इस बदले स्किन टोन की वजह से लोगो का ध्यान तो जाएगा ही। अगर आपके पैर स्मूथ और गोरे हैं पर घुटने काले, तो अपनाइये ये असरदार टिप्स। रोजाना दो बार अपने घुटनों पर नींबू का रस लगाइये। चाहे तो सीधे नींबू के छिलके को ही 5 मिनट तक रगड लीजिये। रगडने के बाद इसको करीब 15-20 मिनट तक ऎसे ही छोड दीजिये और बाद में पैरों को धो लीजिये। नींबू लगाने से त्वचा रूखी हो जाती है इसलिए थोडी देर बाद मॉस्राइजर लगा लीजिये। चीनी को बेकिंग सोडा के साथ मिक्स कर के अपने घुटनों और कोहनियों को चार मिनट तक के लिये रगडे इसके बाद त्वचा को 15 मिनट तक के लिए ऎसे ही छोड दें और बाद में पानी से धो कर बॉडी लोशन लगा लें। दही को नींबू के रस में मिला कर अपने घुटनों को 10 मिनट तक के लिए मालिश करें। उसके बाद इसको ऎसे ही कुछ देर तक लगा छोड दें और फिर सबसे पहले घुटनों को दूध से धोएं और फिर पानी से। जब भी आप नहाएं तब लूफा या किसी स्क्रब से अपने घुटनों की स्क्रबिंग जरूर करें। इससे त्वचा साफ होगी और डेड स्किन हटेगी। सरसों के तेल को नारियल के तेल के साथ मिक्स कर के अपने घुटनों पर लगा कर मालिश करें, इससे घुटने सफेद हो जाएंगे। बादाम या नारियल तेल को चीनी और शहद के साथ मिला कर अपने घुटनों पर 15 मिनट तक लगा रहने दें और धोते समय स्क्रब करें।

नाक से नकसीर निकले तो करे इन अंगों की मसाज

नाक से अक्सर खून न‌िकलना यानी नकसीर फटना बच्चों से लेकर बड़ों तक, हर उम्र के लोगों के ल‌िए आम समस्या है। मौसम में बदलाव से लेकर संक्रमण या फिर ब्लड प्रेशर, एलर्जी , हार्मोनल बदलाव आदि के चलते नाक से खून आने की समस्या हो सकती है।

इससे बचाव के ल‌िए शरीर के कुछ अंगों पर दबाव बनाकर एक्यूप्रेशर तकनीक से आराम पाया जा सकता है। जरूरी नहीं है कि सारे अंगों की ही मसाज करें पर नकसीर फटने के दौरान इनमें से किसी एक अंग पर भी दबाव बनाएंगे तो आपको तुरंत आराम महसूस होगा। अगर आपको अक्सर नाक से खून आने की दिक्कत होती है तो शरीर के इन अंगों की मसाज कर सकते हैं।

चेहरे के एक्यूप्रेशर प्वाइंट्स - दोनों भौंहों के शुरुआती प्वाइंट्स पर उंगली रखें और दबाव बनाएं। इससे नाक से ब्लीडिंग रुकेगी और आंखों को भी आराम म‌िलेगा।

नाक और होठ के ठीक बीच में, जिसे अपर ल‌िप्स भी कहते हैं, उंगली से दबाव बनाएं और कुछ सेकंड बाद छोड़ दें।

चीक बोन के निचले हिस्से, जो आंखों की पुतली के ठीक नीचे हो, पर दबाव बनाएं। इससे न सिर्फ नकसीर फटने बल्कि साइनस के दर्द और कफ में आराम मिलता है।

गर्दन का एक्यूप्रेशर प्वाइंट - गर्दन के बिल्कुल केंद्र में और सिर के ठीक नीचे की हड्डी को टटोलें और इसपर उंगली से दबाव बनाएं। जिन्हें नाक से खून आने की समस्या अधिक होती है, उन्हें इस मसाज से बचाव में मदद मिलती है।

गर्दन का एक्यूप्रेशर प्वाइंट - गर्दन के बिल्कुल केंद्र में और सिर के ठीक नीचे की हड्डी को टटोलें और इसपर उंगली से दबाव बनाएं। जिन्हें नाक से खून आने की समस्या अधिक होती है, उन्हें इस मसाज से बचाव में मदद मिलती है।

हाथों का एक्यूप्रेशर प्वाइंट - इस प्वाइंट पर गर्भवती महिलाएं मसाज न करें क्योंकि यह यूटेरस को भी प्रभावित करता है। अंगूठे और पहली उंगली के बीच के प्वाइंट पर उंगली से दबाव बनाएं और कुछठ सेकंड बाद छोड़ दें।

सिर में हो खुजली तो अपनाए ये टिप्स

पुरूष हो या महिला हर किसी के सिर में कभी-कभार खुजली जरूर होती है। वैसे कहा व देखा यह जाता है कि महिलाओं व बच्चों के सिर में ज्यादा खुजली चलती है। इसका एक आम कारण महिलाओं के बालों में रूसी का होना और बच्चों में जुओं का होना माना जाता है। लेकिन सिर्फ यही दो ऎसे कारण नहीं हैं जिनकी वजह से खुजली होती है और भी कुछ ऎसे कारण होते हैं जिनके कारण न चाहते हुए भी सिर खुजलाना पडता है। यह समस्या ज्याद तनाव या फि र किसी शैंपू की एलर्जी के कारण भी ऎसा हो सकता है। अगर आप इस खुजली से छुटकारा पाना चाहती हैं तो आप नीचे बताए गए कुछ उपायों को आजमाकर इससे छुटकारा पा सकती हैं। बाल धोने के बाद उन्हें जोर से रगडकर पोछें, इससे ब्लड सर्कुलेशन बढेगा और स्काल्प की स्किन हेल्दी रहेगी। पकी हुई उडद दाल और मेथीदाने के पेस्ट से हफ्ते में कम से कम 3 बार बाल धोएं। इससे बालों में किचकिचापन और धूली मिट्टी नहीं जमेगी और आपको खुजली भी नहीं होगी। जैसमिन की जडों को नींबू रस के साथ पीस लें। इससे स्काल्प और बालों को धोएं। पालक, सलाद, गाजर का रस पीएं, बाल व स्काल्प हेल्दी रहेंगे। नारियल या सरसों के तेल से हफ्ते में 3 बार मालिश जरूर करें जितना ज्यादा तेल मालिश करेंगी आप, स्काल्प उतना ही हेल्दी रहेगा। यदि आपके बालों में डैंड्रफ अर्थात् रूसी है तो घबराने की कोई बात नहीं है। आप इस बीमारी से छुटकारा पा सकती हैं। कैसे, आइए जानते हैं

2-2 टीस्पून मेहंदी पाउडर, एक टीस्पून दही, एक टीस्पून मेथीदाना पाउडर एक टेबलस्पून कॉफी, 2 टेबलस्पून तुलसी के पत्तों का रस। इन सबको मिलाकर पेस्ट बना लें और यह पेस्ट 2 घंटें तक बालों में लगाकर रखें। ज्यादा गहरा कलर लाने के लिए पेस्ट को 3-4 घंटे तक लगाकर रखें। इसके बाद किसी भी नेचुरल शैंपू से बाल धोलें।

आधा कप नारियल या नीम के तेल में एक टी स्पून कपूर मिक्स कर लें और इसे एक ग्लास के कंटेनर में स्टोर कर लें। रोजाना सोने से पहले इसे तेल से मालिश करें।

शिकाकाई पाउडर को पके चावल के पानी में मिक्स करके बालों को धोएं।

छोटे प्याज को नारियल तेल के साथ उबालकर बालों में लगाएं। फिर बालों को बेसन और उबले चावल के पानी के मिश्रण से धोएं। इनके अतिरिक्त आजकल बालों की एक और समस्या से पुरूषों और महिलाओं को दो चार होना पड रहा है। वह है बालों का उम्र से पहले ही सफेद हो जाना। सफेद बालों को देखते ही सामने वाला इंसान आपको अंकल, आंटी, चाचा, चाची आदि कहने लग जाता है। इन सम्बोधनों को सुनकर आपको ऎसा लगने लगता है जैसे आप साठ साल के बुजुर्गो में शामिल हो गए हैं। बालों के सफेद होने का सबसे बडा कारण तनाव होता है।

 

नाक से नकसीर निकले तो करे इन अंगों की मसाज

नाक से अक्सर खून न‌िकलना यानी नकसीर फटना बच्चों से लेकर बड़ों तक, हर उम्र के लोगों के ल‌िए आम समस्या है। मौसम में बदलाव से लेकर संक्रमण या फिर ब्लड प्रेशर, एलर्जी , हार्मोनल बदलाव आदि के चलते नाक से खून आने की समस्या हो सकती है।

इससे बचाव के ल‌िए शरीर के कुछ अंगों पर दबाव बनाकर एक्यूप्रेशर तकनीक से आराम पाया जा सकता है। जरूरी नहीं है कि सारे अंगों की ही मसाज करें पर नकसीर फटने के दौरान इनमें से किसी एक अंग पर भी दबाव बनाएंगे तो आपको तुरंत आराम महसूस होगा। अगर आपको अक्सर नाक से खून आने की दिक्कत होती है तो शरीर के इन अंगों की मसाज कर सकते हैं।

चेहरे के एक्यूप्रेशर प्वाइंट्स - दोनों भौंहों के शुरुआती प्वाइंट्स पर उंगली रखें और दबाव बनाएं। इससे नाक से ब्लीडिंग रुकेगी और आंखों को भी आराम म‌िलेगा।

नाक और होठ के ठीक बीच में, जिसे अपर ल‌िप्स भी कहते हैं, उंगली से दबाव बनाएं और कुछ सेकंड बाद छोड़ दें।

चीक बोन के निचले हिस्से, जो आंखों की पुतली के ठीक नीचे हो, पर दबाव बनाएं। इससे न सिर्फ नकसीर फटने बल्कि साइनस के दर्द और कफ में आराम मिलता है।

गर्दन का एक्यूप्रेशर प्वाइंट - गर्दन के बिल्कुल केंद्र में और सिर के ठीक नीचे की हड्डी को टटोलें और इसपर उंगली से दबाव बनाएं। जिन्हें नाक से खून आने की समस्या अधिक होती है, उन्हें इस मसाज से बचाव में मदद मिलती है।

गर्दन का एक्यूप्रेशर प्वाइंट - गर्दन के बिल्कुल केंद्र में और सिर के ठीक नीचे की हड्डी को टटोलें और इसपर उंगली से दबाव बनाएं। जिन्हें नाक से खून आने की समस्या अधिक होती है, उन्हें इस मसाज से बचाव में मदद मिलती है।

हाथों का एक्यूप्रेशर प्वाइंट - इस प्वाइंट पर गर्भवती महिलाएं मसाज न करें क्योंकि यह यूटेरस को भी प्रभावित करता है। अंगूठे और पहली उंगली के बीच के प्वाइंट पर उंगली से दबाव बनाएं और कुछठ सेकंड बाद छोड़ दें।

जीरे के लाभकारी गुण

* हिस्टीरिया के मरीज को गर्म पानी में नींबू, नमक, जीरा, हींग भुनी हुई, पुदीना मिलाकर पिलाने से रोगी को लाभ मिलता है।

* जीरा चूर्ण, हींग चूर्ण एवं सेंधा नमक एक-एक चुटकी भर मिलाकर लेने से पेट की गैस में लाभ मिलता है।

* उल्टी हो तो आधा नींबू का रस, एक पिलास पानी, थोड़ा जीरा, दो छोटी इलायची पीसकर मिलाकर दो-दो घंटे पर पिलाएं।

* लू लग जाने पर नारियल के पानी के साथ काला जीरा पीसकर शरीर पर लेप करने से शांति मिलती है।

* दात में कीड़ा लगने के कारण दर्द हो, तो पीपल, सेंधा नमक, जीरा, सेमल का गोंद तथा हरड़ का बक्कल सम भाग लेकर पीसकर बारीक चूर्ण बनाकर दातों पर मलने से पर्याप्त लाभ मिलता है।

* थायरॉइड (गले की गाठ) में एक प्याला पालक के रस के साथ एक चम्मच शहद और चौथाई चम्मच जीरे का चूर्ण मिलाकर सेवन करने से लाभ होता है।

* सौंफ और जीरे के साथ सेवन करने से पेट की जलन में लाभ होता है।

टमाटर के लाभकारी उपाए

मुँहासे : 200 ग्राम टमाटर-कच्ची हल्दी का रस एक से तीन महीने तक लगातार लेने से फायदा होता है। बीटरूट-सेबफल-अमरूद तथा पपीते का रस रोज पिएँ। खीरा ककड़ी-गाजर-धनिया पत्ती का रस तथा आँवले का चूर्ण रोज लें। अंगूर, नाशपाती, का रस, पालक-टमाटर का रस लेने से कब्ज दूर होगी तथा मुँहासे गायब हो जाएँगे।

गठिया : कच्चे नारियल का पानी-अदरक का रस या नीबू का रस आधा चम्मच मिलाकर लेना चाहिए। चैरी का रस, पालक-टमाटर का रस फायदा करता है। कुनकुने पानी में नीबू का रस तुलसी सुधा, गेहूँ के ज्वारे का रस, सलाद पत्ती का रस पीने से गठिया में राहत मिलती है।

सर्दी - खांसी के घरेलू उपाए

अजवायन, पीपल, अडूसा के पत्ते तथा पोस्त-डोडा- इनका क्वाथ बनाकर पीने से खाँसी, श्वास तथा कफ ज्वर का शमन होता है।

संभालू के पत्तों का क्वाथ और पीपल का चूर्ण मिलाकर पीने से कफ ज्वर का शमन होता है।

हल्दी और दूध गर्म कर उसमें थोड़ा सा नमक और गुड़ डालकर बच्चों को पिलाने से जुकाम तथा कफ रोग मिटता है।

नागरबेल के पत्ते पर एरंड का तेल लगाकर और उसे थोड़ा सा गर्म करके छोटे बच्चों की छाती पर रखकर गर्म कपड़े से हल्का सेंक करने से बालक की छाती में जमा कफ पिघल कर निकल जाता है।

हींग को शराब में खरल करके सुखा लें, उसे दो रत्ती की मात्रा में लेकर मक्खन के साथ खाने से खाँसी, श्वास और दूषित कफ विकार ठीक हो जाता है।

पुदीने का ताजा रस या अर्क कफ, सर्दी एवं मस्तिष्क की सर्दी में अत्यंत उपयोगी है।

वजन कम करना कितना फायदेमंद

बहुत से लोगों को यह नहीं पता है कि लेटस वजन कम करने में कितना फायदेमंद हो सकता है। अगर आप वेट लूज करने का सोच रही हैं, तो लेटस की भरपूर मात्रा अपनी डाइट में शामिल करें। इससे आपको अपने टारगेट को जल्द से जल्द हासिल करने में मदद मिलेगी। चूंकि, लेटस सलाद के तौर पर खाया जाता है, यह काफी सिंपल और इफेक्टिव होता है और वास्तव में आप इसके जरिए वेट कम कर सकते हैं यही नहीं, लेटस डाइजेशन को बढाता है और लीवर को भी हेल्दी रखती है। लेटस डाइट से हार्ट डिजीज, स्ट्रोक, कैटरैक्ट जैसी बीमारियों का खतरा भी कम होता है। लेटस को डाइट में क्यों लेना है जरूरी लेटस में फाइबर ज्यादा होने की वजह से लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस होता है। इसका सलाद काफी मात्रा में खाना चाहिए। इससे दो फायदे होंगे- एक, तो आपको अपना पेट भरा हुआ महसूस होगा। दूसरा, पेट भरा होने के कारण आप हाई कैलरी, डेजर्ट और कार्बोहाइड्रेड ज्यादा नहीं खाएंगे। चूंकि, इस सलाद में कैलरी की मात्रा बहुत ही कम है, तो निश्चित रूप से यह वजन कम करने में आपकी मदद करेगी। सब्जियों के साथ लेटस लेटस को दूसरे सब्जियों के साथ मिक्स किया जा सकता है।

लेटस सलाद में टमाटर और खीरा मिलाकर आप इसे अपने टेस्ट के मुताबिक बना सकते हैं। इससे न सिर्फ यह स्वादिष्ट बनेगा, बल्कि यह आपके डाइट प्लान को और इफेक्टिव बनाएगा क्योंकि टमाटर और खीरा में पानी की मात्रा ज्यादा होती है। इसके चलते शरीर में बनने वाले फ्लूइड और फैटी एसिड यूरीन के जरिए बाहर निकल जाते हैं। शरीर से फैट निकल जाने से वेट कम होने में मदद मिलती है।

सलाद ध्यान रखें कि स्वाद बढाने के चक्कर में कहीं आप सलाद की ड्रेसिंग ऎसी चीजों से न कर लें, जिससे आपके डाइट प्लान पर उलटा ही असर पडे। सलाद की ड्रेसिंग में ऎसी चीजें शामिल न करें जिनसे खाने में हाई कैलरी बढे। लेटस में फाइबर बहुत ज्यादा मात्रा में होता है और इसमें 90 फीसदी पानी होता है। साथ ही इसमें कैलरी न के बराबर होती है।

यही कारण है कि इसकी ज्यादा मात्रा लेने के बावजूद पेट भरा हुआ तो लगता है, लेकिन बॉडी में किसी तरह का फैट नहीं जाता और पानी ज्यादा होने से शरीर से फ्लूइड भी निकलता रहता है। इन दोनों वजहों से वेट कम करने और स्लिम बने रहने में मदद मिलती ही है, शरीर के लिए जरूरी पोषण की कमी भी नहीं होती। लेटस डाइट से शेप में रहने के साथ-साथ आप हेल्दी भी रहते हैं। कितनी मात्रा में हो लेटस और दूसरे हरे सलाद में कैलरी की मात्रा बहुत कम होती है इसलिए इन्हें कभी भी भरपेट खाया जा सकता है। लेकिन सलाद खाते समय हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि वह ताजा हो खासकर से जब आप पत्तेदार सलाद अपने आहार में शामिल कर रहे हों।

 

 

 

पपीता के घरेलू नूस्खें

पपीता अत्यंत गुणकारी एवं सर्वसुलभ फलों में से एक है। इससे निकलने वाला रस अपने वजन से 100 गुना प्रोटीन बहुत जल्द पचा देता है, जिससे आमाशय तथा आँत संबंधी विकारों में बहुत लाभ मिलता है।

पपीते के लाभ

*कब्ज व कफ के रोग में लाभकारी

*गरिष्ठ पदार्थ को आसानी से पचाता है।

*पपीते के सेवन से वात का शमन होता है तथा यह अपावायु को शरीर से बाहर करता है।

*कच्चे पपीते से बनी लुगदी का लेप करने से घाव जल्दी भर जाता है।

*हृदय, नाड़ियों तथा पेशियों की क्रिया ठीक रखने में सहायक है।

*त्वचा व नेत्र स्वस्थ रखने में उपयोगी है।

पालक के घरेलू उपाए

स्त्रियों के लिए पालक का शाक अत्यंत उपयोगी है। महिलाएँ यदि अपने मुख का नैसर्गिक सौंदर्य एवं रक्तिमा (लालिमा) बढ़ाना चाहती हैं, तो उन्हें नियमित रूप से पालक के रस का सेवन करना चाहिए। प्रयोग से देखा गया है कि पालक के निरंतर सेवन से रंग में निखार आता है। इसे भाजी (सब्जी) बनाकर खाने की अपेक्षा यदि कच्चा ही खाया जाए, तो अधिक लाभप्रद एवं गुणकारी है। पालक से रक्त शुद्धि एवं शक्ति का संचार होता है। पालक को मिक्सी में पुदीना के साथ पीस कर मसाज करने से त्वचा में गुलाबी चमक आती है। पीसी हुई पालक बालों के लिए भी उपयोगी है। रोज पालक का ज्यूस पीने से बाल बढ़ते हैं।

खर्राटे से छुटकारा पाने के कुछ उपाए

नई दिल्ली। क्या अपने खर्राटों की वजह से आप अक्सर परिवार के बीच शर्मिंदा होते हैं? अगर ऐसा है तो इससे छुटकारे का आसान उपाय आपकी डाइट में जरा सी तब्दीली है। ब्राजील के शोध की मानें तो भोजन में नमक की मात्रा घटाने से खर्राटों से छुटकारा पाया जा सकता है। शोधकर्ताओं का मानना है कि खर्राटे की समस्या गले की मांसपेशियों और सॉफ्ट टिशु के कारण ऑक्सीजन के प्रवाह ब्लॉक होता है जिससे खर्राटे आते हैं। नमक की अध‌िकता शरीर में ऐसे फ्लूएड का निर्माण करती है जिससे नाक के छिद्र में व्यवधान होता है। इस स्थिति को स्लीप एप्निया कहते हैं। शोध के दौरान, खर्राटे लेने वाले प्रतिभागियों की बिना किसी उपचार के सिर्फ भोजन में नमक की मात्रा कम की गई। लगातार एक सप्ताह तक कम नमक का भोजन कराने के बाद पाया गया कि उन्होंने खर्राटे लेना बंद कर दिया। शोधकर्ता प्रोफेसर जिम हॉर्न के अनुसार, ''डाइट से नमक कम करके गले की भीतरी सूजन को कम करने में मदद मिलती है जिससे खर्राटे को रोकना आसान हो सकता है। हमने इस विधि से अपने शोध के दौरान करीब 80 प्रतिशत प्रतिभागियों को खर्राटे की समस्या से निजात दिलवाया है।''

एसिडिटी से है परेशान तो अपनाए ये उपाए

त्योहारों और शादियों के मौसम में डाइट पर कंट्रोल तो बहुत मुश्किल है। ऐसे में स्पाइसी और ऑयली डाइट का मजा तब किरकिरा हो जाता है जब इसकी कीमत पेट को चुकानी पड़ती है। अगर आप इन दिनों खानपान की जरा सी चूक की कीमत अक्सर एसिडिटी या गैस्ट्रिक के रूप में चुका रहे हैं तो इससे तुरंत आराम के लिए ये आसान उपाय आपकी मदद करेंगे। 

लौंग - एसि़डिटी या गैस्ट्रिक की स्थिति में दो लौंग चबाएं। इसके रस से एसिडिटी में तुरंत राहत मिलती है।

जीरा - एक चम्मच जीरा तवे पर भुन लें। भुनने के बाद उनके हल्का पीस लें और एक ग्लास पानी में मिलाएं। भोजन के बाद इसे जरूर लें।

गुड़ - एसिडिटी या सीने में जलन की स्थिति में गुड़ का एक टुकड़ा चूसें। हां, डायबिटीज के मरीज इस नुस्खे को न आजमाएं।

तुलसी पत्ता - तुलसी पत्ते का सेवन भी एसिडिटी में आराम दिलाता है। पांच से छह तुलसी पत्ते या फिर तुलसी की चाय का सेवन करें, तुरंत आराम महसूस करेंगे।

छाछ - छाछ पेट को ठंडक पहुंचाने में काफी मददगार है। इसमें एक चौथाई चम्मच काली मिर्च मिलाकर इसका सेवन करें। इसे एसिडिटी से तुरंत राहत मिलेगी।
अदरक - भोजन से आधा घंटा पहले अदरक का छोटा टुकड़ा खाएं। इससे एसिडिटी और अपच जैसी समस्या में आराम मिलेगा।

मालवा समाचार

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